Monday, June 20, 2011

Dooriyon se nazdeekiyon tak....!!!!

अपनों को मिलाती है दूरियां .....
पास लेकर आती हैं दूरियां ......

न कह पाए साथ रहकर जो .....
अनकही दास्तान कह जाती हैं दूरियां ....

मीठा सा एक दर्द जगाती हैं दूरियां..... 
कभी हंसाती तो कभी रुलाती हैं दूरियां ......
करे जो मन को बेसुध , व्याकुल , बेकल ........
कानों में ट्रेन की छुक- छुक दोहरातीं हैं दूरियां .....

नजदीकियों के मोल का आभास कराती हैं दूरियां ....
" है कितना गाढ़ा प्यार का रंग "- यह दिखाती हैं दूरियां .....
' दूर होकर भी करीब होने का एहसास है निराला ' ..
कालचक्र के काँटों  से खेल जाती हैं दूरियां ....

तडपाये रात भर ...!!! सोने नहीं देती हैं दूरियां !!!!
जागती आँखों को नाम कर देती  है दूरियां... !!!
आस से ताके दरवाज़े को जो एकटक .....
इंतज़ार की हदें पार कर जाती हैं दूरियां ........

चाहे दे दर्द लाख, ज़रूरी है ये दूरी.!!!!
करे बंधन को मज़बूत ; इंतज़ार की घडी होती है सुनहरी .....

है नशा उस नजदीकी का अजब, जो  मिलाती है लम्बे समय की  दूरी  के बाद ...!!!
चुप रहते हैं दोनों ......आँखें सुनाती है अनकही दास्तान .....!!!!!
हर सांस होती है राहत भरी , क्यूंकि वह होता है नज़दीक तब ...!!!!

दूरियों से ही परवान चढ़ता हैं प्यार ...!!
बज उठते हैं सुरीले तान दिल में ....!!!
आती हैं दूरी के बाद .......ये नजदीकियां .......:-)

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