समझ न क्षितिज को मंजिल अपनी
..जहां और भी है...
न हो उदास कि इकरार बना इनकार
प्यार और भी है ....
सहम गया तू इतने से दर्द से बुजदिल!
दुःख और भी है...
माना तुने इसको सातवा आसमान ?
खुशियाँ और भी है .....
मांग उस खुदा से सितारों की उंचाईयां
महत्वकान्क्षायें और भी है
न मान अपने अप को तनहा
हमराही और भी हैं...
समेट, संभाल अपने आप को
चोटें और भी है
बस!!! न बहा नीर , गातें हुए चुभन भरे राग..
गीत और भी हैं ....
उठा सर, खोल अपनी आँखें,
मुस्कुराहटें और भी है .....
फैला अपनी बाहें, दिल खोल के
अपने और भी हैं ....
छेड़ सुर नया सा कोई
धुनें और भी हैं ...
उड़, लगा के पंख इच्छाओं के..
ऊँचाइयाँ और भी हैं ....
जग रोज़ , पेहेन के मुस्कराहट
सवेरे और भी हैं ....
समेट खुशियाँ अपने लिए भी
मासूमियत और भी है ...
जब अपने लिए तू है,
तो फिर काहे का अकेलापन !!!
..जहां और भी है...
न हो उदास कि इकरार बना इनकार
प्यार और भी है ....
सहम गया तू इतने से दर्द से बुजदिल!
दुःख और भी है...
माना तुने इसको सातवा आसमान ?
खुशियाँ और भी है .....
मांग उस खुदा से सितारों की उंचाईयां
महत्वकान्क्षायें और भी है
न मान अपने अप को तनहा
हमराही और भी हैं...
समेट, संभाल अपने आप को
चोटें और भी है
बस!!! न बहा नीर , गातें हुए चुभन भरे राग..
गीत और भी हैं ....
उठा सर, खोल अपनी आँखें,
मुस्कुराहटें और भी है .....
फैला अपनी बाहें, दिल खोल के
अपने और भी हैं ....
छेड़ सुर नया सा कोई
धुनें और भी हैं ...
उड़, लगा के पंख इच्छाओं के..
ऊँचाइयाँ और भी हैं ....
जग रोज़ , पेहेन के मुस्कराहट
सवेरे और भी हैं ....
समेट खुशियाँ अपने लिए भी
मासूमियत और भी है ...
जब अपने लिए तू है,
तो फिर काहे का अकेलापन !!!
दे खुद को ख़ुशी पहले ..
तभी बाँट पायेगा औरों में ख़ुशी तू..
औरों के साथ कर खुद से भी प्यार ,
अपने लिए तू और भी है ......:-)