"एक खुला आसमान......!!!! "
चाहे वह उड़ना पंछी जैसे
ऊँचा, सबसे ऊँचा.......
चाहे वह बादलों से लिपटना
और सुनाना अपनी व्यथा!
चाहे वह पहाडों पर चढ़कर
चिल्लाना ज़ोरों से..........
और चाहे सन्नाटे में बहुत कुछ कह जाना......
चाहे वह जाना दूर .....
इस दुनिया से....... कोसों दूर .........
और चाहे अपने आप को
जोड़ना क्षितिज से.......
चाहे वह चीरना समुन्दरों को
तैरते हुए, बन के मीन
और चाहे हवा को छूकर
खो जाना अनंत में.....
चाहे वह कहना बहुत कुछ ...
पर कह न पाए , नादान वो.....
काश के हो ऐसा !!!!
बिन कहे सब कह जाए मन....
मन बाँवला चाहता बहुत कुछ .
अनाड़ी है चंचल ये....
हर चाह नहीं होती पूरी.....
पर ये सत्य वो जाने कैसे !!!!!
चाहतें होती नहीं ख़तम कभी....
क्या लोभी है मेरा मन ?
मन सपने संजोता ही जाता.....
आस होती नहीं ख़तम......
मन काबू करें कुछ ऐसे..
चाहतें होती नहीं ख़तम कभी....
क्या लोभी है मेरा मन ?
मन सपने संजोता ही जाता.....
आस होती नहीं ख़तम......
मन काबू करें कुछ ऐसे..
कि चाहतें बेकाबू न हो जाये....
सोचे और समझे कटु सत्य यह...
धुंध में न खो जाये.....
पर क्या ऐसा करना..
गलत नहीं है मेरे दोस्त!!
एक मासूम सा मन ही तो है यह ....
चाहता बटोरना थोड़ी सी ख़ुशी
क्या ये छोटी सी इच्छा.....
पूरी ना कर पाएंगे हम कभी?????
मन की छलांग है कुछ ऐसी ....
आती नहीं काबू में यूँ ....
रोको ना इसकी उड़ान को...
पंख दो इस बांवले को....
उलझनों को कर किनारे ..
उड़ने दो अपने मन को .....
कर गुज़र जाये यह कुछ ऐसा....
सोचा भी ना हो किसीने जो...!!!!
उड़ान भरे ये कुछ ऐसी
हो जाये सारी सीमाएं पार......
हो ना ख़त्म कभी स्वप्न इसके
ले वह सभी सच्चाई का आकार......:-) :-)
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