Tuesday, October 11, 2011

फिर........

फिर बरसेगा सावन अधनी शाम को ......

फिर करेंगी बूँदें, शरारत नटखट सी ........

फिर होंगी सांसें तेज़, पास आएगा वो जब .....

फिर नाचेगा मन, लगाकर पंख .....

फिर गायेगा सन्नाटा राग सुरीले...

फिर लिपटेगी बांवली हवा बांहों में....

फिर होंगी तन्हाई तनहा.... जो होगा वो करीब.....

फिर धड्केगा दिल, लगा सुर ताल ....

फिर गूंजेगी  फिज़ा, बज उठेंगे तान.....

फिर लगेगी हर सुबह ताज़ी.......

फिर होगी चेहरे पर 'बिन मौसम मुस्कान'...

फिर हो जायेगी भूक-प्यास बेवफा......

फिर ताकेगी नज़रें घडी की टिक-टिक को.......

फिर खिल उठेगा मन, आएगा वो जब ......

फिर चुप रहेंगे होठ, सब बोल जायेंगी आँखें.....

फिर जागेगी तमन्नाएं .....

और ...फिर से होगा प्यार .........!!       
   

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